Photo Credit: Philippe Put feeding the baby via photopin (license)

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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बधाई हो आपका बच्चा लगभग 6 महीने का हो चुका है और अब वह नए खाद्य पदार्थों और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए तैयार है। 

ठोस आहार देना कब शुरू करें

जैसा हम पहले भी कई बार बता चुकें हैं कि पहले 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ़ माँ का दूध ही देना है और छह महीने के बाद आप उसे ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं। लेकिन, ध्यान रखें आपको स्तनपान बंद नही करवाना है क्योंकि ठोस आहारों को स्तनपान या फार्मूले दूध के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। 

जब आपका शिशु कब ठोस आहारों के लिए तैयार होता है, तो वह कुछ संकेत देता है। आपको इन संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना है। इनमें से कुछ संकेत हैं –  

  1. अब आपके शिशु का सिर स्थिर हो गया है और वह सहारे के बिना या कम से कम सहारा लेकर बैठ सकता है। 
  2. अब वह दूसरों को खाते हुए देखकर भोजन में रुचि व्यक्त करने लगता है।  
  3. जब भी आप भोजन से भरा चम्मच शिशु के मुंह के पास लेकर जाते हैं, तो वह उत्साहित हो जाता है और उसे खाने के लिए आतुर हो जाता है।  
  4. शिशु भोजन को मुंह में आगे-पीछे करने और निगलने में में सक्षम हो जाता है।
बच्चे के लिए पहला भोजन क्या होना चाहिए?

बच्चे के ठोस आहार की शुरुआत आयरन-फोर्टिफाइड बेबी राइस या ओटमील को स्तन के दूध/ फॉर्मूला दूध के साथ मिला कर देने से की जा सकती है। चावल और दलिया आमतौर पर गैर-एलर्जेनिक होते हैं, इसलिए इन्हें ठोस आहार की शुरुआत के लिए उचित माना जाता है। यह सिर्फ एक सुझाव मात्र है, ऐसा नहीं है कि आपको इसी भोजन से ठोस आहार देने की शुरुआत करनी है। इसके अलावा, आप कुछ अन्य खाद्य पदार्थों जैसे मसली हुई शकरकंद, गाजर, सेब, नाशपाती, केला और आड़ू इत्यादि भी शामिल कर सकते हैं। इनमें से कुछ चीजों को सीधे ही मसला जा सकता है, और कुछ को पहले उबालना पड़ता है। 

कुछ लोग डिब्बा बंद रेडीमेड आहारों का भी इस्तेमाल करते हैं।  लेकिन, हमारा सुझाव है कि आप शिशु के लिए भोजन घर पर ही तैयार करें।  इससे न केवल आपके पैसे और समय की बचत होती है, बल्कि आप भोजन की गुणवत्ता के बारे में भी निश्चिंत रहेंगे। 

यह भी पढ़ें : सेब की प्यूरी – अपने बच्चे के लिए सेब की प्यूरी कैसे बनाएं?

ऐसे में आप किसी भी प्रकार के ठोस आहार की शुरुआत करें, लेकिन आहार से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण नियम का पालन करना न भूलें।  भोजन इष्टतम तापमान पर हो, नरम हो, और आसानी से निगला जा सकने वाला हो।

बच्चे को कैसे खिलाएं?
    1. सबसे पहले, बच्चे को  खिलाने के लिए एक उचित स्थान का चुनाव करें। शिशुओं के लिए बनाई गई हाईचेयर या बेबी सीट की मदद भी ले सकते हैं।  
    2. उचित स्थान के इस्तेमाल से बच्चे की खाने में रूचि बढ़ती है। 
    3. बच्चे को खिलाते समय इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा खुश हो , शांत हो, और नींद में न हो। इससे अगर बच्चा खाने में रूचि नहीं दिखाता, तो आपको समझने में आसानी रहती है कि भोजन के प्रति उसकी रूचि में कमी के कारण उपरोक्त तीन नहीं है।  
    4. यह भी सुनिश्चित करें कि बच्चा न तो बहुत भूखा हो और न ही उसे हाल-फ़िलहाल में दूध पिलाया गया हो, जिस वजह से उसे भूख ही न हो।   
    5. चम्मच के साथ भोजन खिलाते समय भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दें। 
    6. भोजन के अंतराल को मजेदार  बनाने की हर संभव कोशिश करें।  
    7. खाना खिलाते समय कोई जोर-जबरदस्ती न करें। बच्चे द्वारा भोजन के (स्वाद) प्रति दिखाई गई हर अस्वीकृति को ध्यान में रखें।  
    8. यदि बच्चा शुरू में भोजन में अरुचि दिखाता, तो उसे सिप्पी कप या चम्मच से पानी की एक घूंट पिलाएं। फिर उसे खिलाने की पुनः कोशिश करें। अगर फिर भी  शिशु खाने को तैयार नहीं है, तो आपको उस दिन अपने प्रयास को रोककर अगले दिन प्रयास करना चाहिए।   
    9. कुछ बच्चे खाते समय चम्मच पकड़ना चाहते हैं। ऐसे में, अपने शिशु को चम्मच पकड़ लेने दें। ऐसा करने से उन्हें लगता है कि वे अपने हिसाब से भोजन कर रहें है, जो कि एक अच्छा अभ्यास है।    
    10. शुरुआत में, आपके शिशु के लिए माँ का दूध या फार्मूला दूध ही पोषण का पर्याप्त स्रोत है। ऐसे ठोस आहार का तो उन्हें केवल एक बड़ा चम्मच ही चाहिए।


    यह भी पढ़ें : बच्चे को ठोस आहार कब से देना चाहिए?

    किसी भी तरह के नए आहार में रूचि पैदा करने के लिए, अपने शिशु को उत्साहित करते रहें। उसकी पसंद को जानने की कोशिश करें। याद रखें, शुरू में यह भोजन की मात्रा के बारे में नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को सीखने के बारे में है। हैप्पी फीडिंग!

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