Mera baccha khana hi nahi khata kuch bhi do mana krta hai ya rota hai
2 साल के बच्चे का ऐसा करना बहुत ही आम बात है। अक्सर इस उम्र के बच्चे ऐसा करते हैं। ऐसा करने के पीछे उनका प्रमुख कारण हर चीज पर खुद का नियंत्रण रखना होता है। यह बहुत ही स्वाभाविक है और इसके बारे में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।
क्योंकि आपने अपने बच्चे के स्वस्थ और विकास के बारे में कुछ नहीं लिखा, तो मैं यह मानकर चल रही हूँ कि आपका बच्चा स्वस्थ है और उसका विकास ठीक रूप से हो रहा है।
ऐसे में, आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है, बल्कि अपने बच्चे की भूख पर नजर रखनी है। आपको उसके शरीर को समझना होगा कि कब उसे भूख लगती है।
मेरी बेटी भी पहले ऐसा ही किया करती थी। फिर मुझे मेरे डॉक्टर ने सलाह दी कि उसके खाने के अंतरालों को 3 की जगह 6 हिस्सों में बाँट दो। आपको भी कुछ ऐसा ही करना है। इसका मतलब यह है कि अपने बच्चे के शरीर की जरूरत के हिसाब से उसको जो भी भोजन सुबह, दोपहर एवं रात को देती हैं, उसे दिन में 6 अलग-अलग समय में बाँट कर दें।
दूसरा, इस बात का खास ध्यान रखें कि भोजन से कुछ घंटे पहले उसे ऐसा कुछ न दें जिससे उसकी भूख मर जाए जैसे कि दूध, बिस्कुट इत्यादि। बच्चे को खाने के समय से तकरीबन आधे घंटे से एक घंटे पहले थोड़ा पानी पिलाए क्योंकि इससे उसकी भूख में वृद्धि होगी। फिर खाने के बाद, उसे कुछ समय तक पानी न दे, ताकि भोजन आसानी से पच सके।
वयस्कों की तरह, शिशु भी भोजन में नयापन खोजते हैं। इसलिए जहाँ तक हो सके, उसके पसंदीदा आहारों को नए-नए तरीकों से बनाने की कोशिश करें और कुछ-न-कुछ ऐसा करते रहे कि उसके जरूरत के हिसाब से पौष्टिक भोजन मिलता रहे।
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