Reasons Behind Delayed Tooth Eruption
Reasons Behind Delayed Tooth Eruption
Photo Credit: Pixabay

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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जब शिशु जन्म लेता है, तो उसके मसूड़ों के नीचे पहले से ही दाँत होते हैं। जिस तरह एक शिशु के रेंगने से लेकर चलने तक सभी चीजें समय के साथ होती हैं, उसी तरह उसके दाँत भी समय के साथ ही आते हैं। ऐसे में, माता-पिता चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते। अगर बच्चे के दाँत जल्दी निकल आए, तो माता-पिता बहुत खुश हो जाते हैं। लेकिन, अगर बच्चे के दांत निकलने में देरी हो, तो माँ-बाप काफी चिंतित हो जाते हैं और यह सोचने लगते हैं कि कही कोई गड़बड़ तो नहीं है। अगर विशेषज्ञों की मानी जाए, तो ऐसे में डरने की कोई जरूरत नहीं है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इस लेख में हम बच्चे के दांत निकलने में देरी के संभावित कारणों पर ही चर्चा करेंगे।

बच्चे के दांत निकलना कब शुरू होते हैं

आपके बच्चे का पहला दाँत जीवन के तीसरे या चौथे महीने से पहले दिखाई देने की संभावना बहुत कम होती है। इस अवधि से पहले दाँत के निकलने को समय से पहले दाँत आना माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, यदि 13 महीने की उम्र तक बच्चे का कोई भी दाँत दिखाई नहीं देता, तो इसे दाँत निकलने में देरी माना जाता है।

जरूर पढ़े –  दाँत निकलने से पहले के लक्षण

अधिकांश मामलों में, बच्चे का पहला दाँत 4-6 महीने की उम्र में फूटता है। हर बच्चे में यह उम्र दूसरे बच्चे से भिन्न हो सकती है। दाँत निकलने की शुरुआत मध्य-तल से होती है और सबसे पहले दो दाँत दिखाई देते हैं और फिर चार। इसी तरह दाँत जोड़ों में दिखाई देते रहते हैं। 3 साल की उम्र तक, अधिकांश बच्चों में 20 दाँत आ जाते हैं।

दांत निकलने में देरी के संभावित कारण

समस्या का पारिवारिक इतिहास

कुछ मामलों में, समस्या का पारिवारिक इतिहास होना भी दाँतों के निकलने में देरी का कारण बन सकता है। यदि माता-पिता में से किसी एक को भी दाँत निकालने में देरी का सामना करना पड़ा था, तो शिशु के भी इस समस्या से ग्रस्त होने की संभावनाएं बनी रहती है। अगर माता पिता के मामले में देरी का कोई चिकित्सीय या विकासात्मक कारण नहीं था, तो  अपने शिशु के मामले में आपको ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

जन्म से जुड़ी शारीरिक समस्याएं

कई मामलों में दाँत निकलने की देरी के लिए जन्म से जुड़ी कुछ शारीरिक समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इनमें से, समय से पहले शिशु का जन्म एवं शिशु के कम वजन का पैदा होना, दो प्रमुख समस्याएं हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को इनेमल दोष (तामचीनी दोष) भी हो सकता है। कुछ आनुवंशिक बीमारियाँ जैसे कि रीजनल ओडोन्टोडप्लासिया भी देरी से दाँत या खराब दाँत आने के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं।

कुपोषण या विटामिन या खनिजों की कमी

देरी से दाँत आना कुपोषण, विटामिन या खनिजों की कमी के लक्षण के रूप में देखे जा सकते हैं। दाँत फूटने में देरी विशेष रूप से कैल्शियम और विटामिन डी की कमी की ओर इशारा करती है। यह डाउन सिंड्रोम से जुड़ा हो सकता है।

जरूर पढ़े – बच्चे की डेंटिस्ट से पहली मुलाकात के लिए कुछ सुझाव

हाइपोथायरायडिज्म

जहाँ हाइपोथायरायडिज्म कमज़ोरी, थकान, सिरदर्द या जोड़ों में अकड़न जैसे कई अन्य कारणों के लिए जिम्मेदार समझा जाता है, वहीं बच्चों में इसे चलने में देरी, भाषण में देरी, दाँतों में देरी और अधिक वजन से जोड़ा जाता है।

दाँत निकलने में होने वाली देरी को कब असामान्य माना जाता है

अगर आपके बच्चे का 18 महीने की उम्र तक कोई दाँत नहीं निकलता, तो आपको जल्दी ही एक दंत चिकित्सक से मिलना चाहिए। 4 और 15 महीनों के बीच के अंतराल को पहले दाँत के फूटने और बाकी दाँतों के निकलने के लिए एक सामान्य अंतराल समझा जाता है। अधिकांश बच्चों के 11 महीने की आयु तक चार दाँत, 15 महीने तक आठ दाँत, 19 महीने तक 12 दाँत, 23 महीने तक 16 दाँत और 27 महीने तक 20 दाँत आ जाते हैं।

अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।

छह साल की उम्र से स्थायी दाँत दिखाई देने लगते हैं। भले ही दाँत ऊपर दिए गए पैटर्न का पालन न करें, पर अगर दी गई अवधि में बताए गई संख्या में दाँत आ जाए, तो चिंता की कोई बात नहीं है।

लेकिन अगर 18 महीने की उम्र तक कोई दाँत विकसित न हो, तो यह ठीक नहीं है और स्वास्थ्य समस्याओं की ओर एक खुला संकेत है। ऐसे मामले में, आपको तुरंत ही दंत चिकित्सक या बाल रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

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