Gestational Diabetes – Causes, Signs, and Precautions
Gestational Diabetes – Causes, Signs, and Precautions
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Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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अगर आप गर्भावधि मधुमेह से ग्रस्त है, तो आपको कुछ चीजों का खास ध्यान रखना पड़ता है। क्या आप जानती हैं कि गर्भावस्था के दौरान अपने ब्लड शुगर लेवल (रक्त शर्करा स्तर) को नियंत्रण में रखकर आप अपने बच्चे को किसी जन्मजात बीमारी होने की संभावना से दूर रख सकती हैं? गर्भावधि मधुमेह से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कई कदम उठा सकती हैं। लेकिन, उन सावधानिओं के बारे में जानने से पहले, गर्भावधि मधुमेह के कारणों एवं संकेतों को जान लेना जरूरी होता है।

गर्भावधि मधुमेह होने के कारण

आपको गर्भावधि मधुमेह होने की संभावना अधिक है यदि:

  • आप मोटे हैं और आपका बॉडी मास इंडेक्स 30 से अधिक है। बॉडी मास इंडेक्स के बारे में ज्यादा जानने के लिए आपने डॉक्टर से पूछें।
  • आपने पहले निर्धारित से भारी (>4.5 किलोग्राम) वजन के बच्चे को जन्म दिया है।
  • आपको पिछली गर्भावस्था में भी मधुमेह था।
  • आपके परिवार में मधुमेह ग्रेड 1 का इतिहास रहा होगा।

जरूर पढ़े – नवजात शिशुओं में हाइपोग्लाइसीमिया अर्थात अधोमधुरक्तता/रक्तशर्कराल्पता के लक्षण, कारण और उपचार

गर्भावधि मधुमेह के लक्षण

हालांकि गर्भावधि मधुमेह एक आमतौर पर होने वाली समस्या नहीं है, फिर भी आप निम्नलिखित लक्षणों से इसका अंदाजा लगा सकते हैं –

  • आप बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं।
  • आपको लगता है कि आपका मुंह बार-बार सूखने लगा है और आपको बार-बार प्यास लगती है।
  • आपको बार-बार पेशाब आता है।
  • आपकी नजर धुंधली होने लगती है।

गर्भावधि मधुमेह से जुड़ी सावधानियां

गर्भधारण से पहले डॉक्टर से सलाह कर लें

अगर आप मधुमेह से ग्रस्त हैं, तो गर्भधारण से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपका निरिक्षण करके इस बात को जाँच सकता है कि अभी तक मधुमेह ने आपके शरीर पर क्या असर डाला है। डॉक्टर न सिर्फ आपको ब्लड ग्लूकोस नियंत्रण के बारे में बताएगा, बल्कि अगर उसे लगता है, तो वह आपकी दवा में बदलाव करने एवं नियमित रूप से जांच का सुझाव भी दे सकता है। अगर आपका वजन निर्धारित से अधिक है, तो ग्लूकोस नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए, गर्भधारण से पहले आपको वजन कम करने की सलाह देगा।

स्वस्थ आहार लें

मधुमेह वाले लोगों के लिए स्वस्थ आहार खाना बहुत जरूरी होता है। एक पोषण विशेषज्ञ (नूट्रिशनिस्ट) आपको स्वस्थ आहार सूची बनाने एवं गर्भावस्था के दौरान रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसलिए अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं, तो पोषण विशेषज्ञ से जरूर मिलें।

हाइपोग्लाइकेमिया का समय रहते इलाज करें

रक्त शर्करा नियंत्रण के दौरान आपको हाइपोग्लाइकेमिया का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप मधुमेह या इंसुलिन की दवा ले रहे हैं, तो आपको चीनी (शर्करा) का कोई न कोई स्रोत अपने पास अवश्य रखना चाहिए जैसे कि कोई टॉफ़ी, कैंडी या ग्लूकोज की गोलियां इत्यादि। घर के अन्य सदस्यों एवं जिनके साथ आप ज्यादा रहते हैं, उन सबको अपने हाइपोग्लाइसेमिक संकट के बारे में पहले से बता कर रखें।

जरूर पढ़ेभ्रूण मैक्रोसोमिया – सामान्य से अधिक वजन वाले शिशु को जन्म देने से जुड़े कारण और जोखिम

नियमित रूप से व्यायाम करें

व्यायाम, रक्त शर्करा को नियंत्रित करने का एक और तरीका है। अपने डॉक्टर से परामर्श करने के बाद, आप गर्भावस्था से पहले, दौरान और बाद में व्यायाम कर सकते हैं। सप्ताह में कम से कम 5 दिनों के लिए मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम करें। इसके लिए 30 मिनट का समय बहुत होगा।

अपनी दवाओं और इंसुलिन को सुझाव डॉक्टरी सलाह अनुसार लें

यदि आपका डॉक्टर दवाओं या इंसुलिन निर्धारित करता है, तो रक्त शर्करा नियंत्रण करने के लिए, उन्हें ठीक समय और सही मात्रा में लेते रहें। दवा और इंसुलिन लेने में कोई लापरवाही न करे क्योंकि इससे आपको गंभीर क्षति का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।

अपने रक्त शर्करा को जांचते रहें

क्योंकि आपके शरीर की ऊर्जा की ज़रूरत तेज़ी से बदल रही हैं, इसलिए आपको समय-समय पर रक्त शर्करा की जांच करवाते रहना चाहिए। आपके रक्त शर्करा के परीक्षण के परिणामों के आधार पर आप अपने पोषण विशेषज्ञ से यह जान लें कि आपको कब, क्या, कितना और कैसे खाना है? साथ ही, यह भी जान लें कि आपको कितना व्यायाम करना है और कितना इंसुलिन लेना है?

अगर गर्भावधि मधुमेह का समय रहते इलाज नहीं करवाते, तो इससे न केवल आपको बल्कि बच्चे को भी नुकसान होगा। यह समस्या गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की क्षति और जटिलताओं का कारण बन जाएगी। वृद्धि के लिए आवश्यकता से अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त करने से, भ्रूण सामान्य की तुलना में अधिक बड़ा और भारी हो जाएगा। इस समस्या को मैक्रोसोमिया कहा जाता है।

इस समस्या के कारण बच्चे के जन्म से पहले होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए गर्भावधि मधुमेह को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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