किसी शिशु को जन्म देना ज़िंदगी का एक बहुत ही खूबसूरत पल होता है। पर फिर भी शिशु के जन्म के बाद आने वाले कुछ बदलाव हमें थोड़ा सा चिंतित तो अवश्य करते हैं। आप चाहे पहले भी माँ बन चुकी है या आप पहली बार माँ बनी है, नवजात शिशु के जन्म के बाद का पहला हफ़्ता आपके लिए जहाँ खुशी भरा होता है वहीं थोड़ी घबराहट भी लाज़मी है।
इसमे कोई शक नहीं है कि किसी बच्चे को जन्म देना और बाद में उसका पालन पोषण करके उसको बड़ा करना एक आसान काम नहीं है। शायद आप यह नहीं जानती होंगी कि जिस पल शिशु आपके घर में प्रवेश करता है उसी पल से वो थोड़ा डरा हुआ महसूस करता है। आइए आज जानते है कि नवजात शिशु के जन्म के बाद पहले हफ्ते में आने वाली मुश्किलें कौन-कौन सी हैं?
1.शिशु का शौच
शिशु की सबसे पहली शौच काले या हरे रंग की होती है। इसका प्रमुख कारण है आम्नियोटिक फ्लूईड, कोशिकाए, म्यूकस जैसी कई चीज़े जो शिशु आपनी माता के गर्भ में निगलता है। और जन्म के बाद, शिशु को इन सब चीज़ों को अपने शरीर से बाहर निकालना ही पड़ता है। यह आमतौर पर काले रंग की शौच के रूप में बाहर आते हैं। घबराने की कोई बात नहीं हैं। असल में इसके काले रंग का होना एक अच्छा संकेत है। उसके बाद आपके शिशु के शौच का रंग बदलता जाता है – हरे–काले रंग की, सरसों की तरह के पीले रंग की, और कस्टर्ड जैसे रंग की। चिंता मत करे, यह बिल्कुल सामान्य बात है।
क्योंकि शिशु का शरीर अभी बाहरी वातावरण के अनुकूल धीरे-धीरे होगा, तो उसमे समय लगना स्वाभाविक है। ध्यान रहें कि शुरू-शुरू में आपका शिशु दिन में कई बार शौच करेगा। चौथे दिन तक आपको कम से कम 8 से 10 डाइपर शौच के और इससे भी ज़्यादा पेशाब के, साफ करने पड़ सकते है। शिशु कितनी बार शौच करता है यह चिंता का विषय नहीं है, बस ध्यान रखें कि डाइपर में खून ना हो।
जहाँ तक मेरे शिशु का सवाल था तो शुरू-शुरू में उसको 10-12 शौच होती थी। यकीन मानिए कि यह देख कर मैं भी चिंतित हो गई थी और अपने शिशु विशेषज्ञ से बात की। उन्होने बताया कि यह बहुत ही सामान्य बात है और जैसे-जैसे आपका शिशु बाहरी वातावरण के अनुकूल होगा, उसकी शौच करने की गिनती कम होती जाएगी। अब क्योंकि वो चार महीने की है, तो वो दिन में सिर्फ़ 2 बार शौच करती है और कई बार तो एक बार ही करती है।
जरूरी नोट – पाँच दिन तक अगर आपका शिशु शौच ना करे तो इसमे कोई चिंता का विषय नहीं है, पर आप उस से पहले भी अपने शिशु विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते है।
2.गर्भनाल
हम जानते है कि शिशु कुछ हफ्तों तक गर्भनाल के साथ ही होते है और कुछ शिशुओं में यह दूसरे शिशुओं से जल्दी झड़ जाती है। शुरू के दिनों में तो यह रब्बर के जैसी सख़्त महसूस होती है पर पहले हफ्ते के समाप्त होते ही यह काले रंग की हो कर सूखने लगती है। जब यह पूरी तरह से काली रंग की हो कर सूख जाती है, तब अपने आप से ही झड़ जाती है। इसमे आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
आपको इस बात का खास ध्यान रखना है कि जब तक आपके शिशु की गर्भनाल झड़ नहीं जाती तब तक आपको अपने शिशु को नहलाना नहीं है। आप अगर चाहती है तो अपने शिशु को स्पंज बाथ दे सकती हैं, पर जहाँ तक पानी का सवाल है तो उसके लिए मेरे तरफ से तो “एक बड़ी ना” हैं। पानी को नकारे जाने का एक प्रमुख कारण है पानी से होने वाला संक्रमण (इन्फेक्षन)। अतः, अपने शिशु को तब तक पानी से दूर रखे जब तक उसकी गर्भनाल उतर नहीं जाती।
मैने यह ग़लती कर दी थी और मेरे शिशु की गर्भनाल इन्फेक्टेड हो गई थी। उसको ठीक करने के लिए मुझे उस पर नमक और पानी का घोल बना के लगाना पड़ा था। खैर, फिर गर्भनाल को झड़ने में एक महीना लगा और तब तक मैने अपने शिशु को सिर्फ़ स्पंज बाथ दिया।
3.शिशु की साँसे
नवजात शिशु की साँसे नियमित नहीं होती। कई बार नवजात शिशु 4-5 साँसे बहुत तेज़ी से लेते है और फिर 5-10 सेकंड का एक ठहराव आ जाता है अर्थात वो साँस लेना ही बंद कर देते हैं। यह बिल्कुल सामान्य बात है और इससे आपको भयभीत होने की जरूरत नहीं है। असल में आपके शिशु के फेफड़े सांस लेने के तरीकों को समझ रहें है और उसके आदि हो रहे है। जब तक आपका शिशु ज़ोर-ज़ोर से और बहुत तेज़ी से साँस नहीं ले रहा हो या किसी किस्म की घरघराहट ना सुन रही हो, तो आपको समझना चाहिए कि सब सामान्य है।
4.शिशु को लपेटना
कुछ माता-पिता अपने शिशु को लपेट के रखने के हक़ में होते है और कुछ नहीं। पर यकीन मानिए कि यह शिशु को बाहरी शोरगुल से बचा के रखने के लिए एक बहुत ही अच्छी तकनीक है। जब आप अपने शिशु को ठीक तरीके से और टाइट करके लपेट कर रखते है तो उसको ठीक उसी सुरक्षा का अहसास होता है जो उसको अपनी माता के गर्भ में होता था। जब उनको ठीक तरीके से और टाइट करके लपेट कर रखते हैं तो उनको एक अच्छी नींद लेने में बहुत मदद मिलती है क्योंकि शिशु अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है।
इसके साथ साथ आपको यह भी ध्यान रखना है कि कुछ शिशु लपेटे जाने को आरामदायक नहीं मानते, वो चाहते है कि उनको कोई गोद में टाइट उठाए रखे।
मेरे केस में भी ऐसा ही हुआ था। मेरे बेटी भी लपेटे जाने को कभी पसंद नहीं करती और तभी सोती है जब उसको बाहों में कस्के उठाया जाए। इसलिए जाँच ले की आपका शिशु किस पोज़िशन में ज़्यादा आरामदायक महसूस करता है।
5.स्तनपान
इस क्षेत्र में भी बहुत सी माताओं को नवजात शिशुओं के पहले हफ्ते में काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पर नयी माताओं को मैं अपने तजुर्बे से बताना चाहूँगी कि यह कोई चिंता का विषय नहीं है और समय के साथ इस समस्या का हल हो जाता है। कुछ शिशुओं को हर घंटे दूध पिलाना पड़ता है और कुछ शिशुओं को 2 घंटों में एक बार। एक बार आपका शिशु स्तनपान करना सीख जाता है तो उसको दोनो ओर स्तनपान करने में ज़्यादा से ज़्यादा आधे घंटे से लेकर 45 मिनिट का समय लगता है।
मुझे भी अपने शिशु के साथ पहले हफ्ते कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था, क्योंकि जहाँ मेरे शिशु के लिए स्तनपान करना एक नई प्रक्रिया थी वही मेरे लिए भी यह एक नया तजुर्बा था। शिशु के जन्म के बाद पहले हफ्ते में तो बहुत दिक्कत महसूस होती थी क्योंकि आपका शिशु आपके अनुमान से पहले भूख महसूस करने लगता है। उसका ऐसा करना स्वाभाविक भी है क्योंकि शुरू शुरू में शिशु के पेट का आकार बहुत ही छोटा होता है।
अगर आप अपने शिशु को स्तनपान की बजाए फ़ॉर्मूला दे रही है (माता के दूध की उनुपस्थिति की वजह से), तो भी आपको ध्यान रखना है कि शिशु को कब दूध देना है। पर फ़ॉर्मूला के केस में आपको ज़्यादा समय मिल जाता है क्योंकि फ़ॉर्मूला हज़म करने में आपका शिशु ज़्यादा समय लेता है।
6.नींद का अभाव – पूरी नींद ना मिलना
शिशु के घर आने के बाद पहले हफ्ते आपको नींद के अभाव का सामना भी करना पड़ेगा। इसका प्रमुख कारण है आपके शिशु को आपकी हर वक़्त ज़रूरत रहती है। बहुत ही कम हालातों में नवजात शिशु पूरी 16-20 घंटे की नींद लेते है। इन्हीं हालातों में आप भी पूरी तरह से आराम ले पाती है। मगर ज़्यादातर नवजात शिशु ऐसा नहीं करते और हर समय आपको उनके लिए उपस्थित रहना पड़ता है। शुरुआत मे यह बहुत ही मुश्किल लगेगा और आपको यह भी महसूस होगा कि आप हार जाओगे, पर ऐसा नही होगा और आहिस्ता-आहिस्ता आपका शरीर खुद को इस बदलाव के अनुकूल बना लेगा।
जब आपका शिशु सो रहा हो तो उस समय सोने का प्रयास करे, पर ऐसा कर पाना तभी संभव होगा जब आपके पास कोई और मदद मौजूद हो। इसलिए बेहतर यह रहेगा कि शिशु के जन्म के बाद पहले हफ्ते के लिए किसी नज़दीकी को अपनी मदद के लिए बुला ले।
क्योंकि मैं खुद पहली बार माँ बनी हूँ और मैने महसूस किया है कि ना सिर्फ़ पहला हफ़्ता बल्कि शिशु के जन्म के बाद आने वाले कई हफ्ते आपके लिए बहुत चुनौती भरे हो सकते हैं। पर क्योंकि मैं खुद उनमे से गुज़री हूँ, इसलिए मेरा यह मानना है कि यह थोड़ा सा मुश्किल दौर बहुत जल्दी निकल जाता है। अब क्योंकि मेरा खुद का शिशु 4 महीने का हो चुका है, मैं कई बार सोचती हूँ कि समय कितनी तेज़ी से निकल जाता है।
हिम्मत रखें क्योंकि एक माँ को कुदरत ने वो सब कुछ दिया है जिसकी उसको इस वक़्त सबसे ज़्यादा जरूरत होती है।
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