
दस्त एक विशेष समस्या है, खासकर जब एक साल या इससे बड़ी उम्र के बच्चों को इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। आपकी जानकारी हेतु बताना चाहेंगे कि विशेषज्ञों के मुताबिक दस्त एक बीमारी नहीं, बल्कि कई अन्य बीमारियों के होने का एक संकेत है। हालांकि, दस्त एक सामान्य समस्या है और बहुत ही कम मामलों में इससे जीवन को कोई खतरा होता है। फिर भी हमारे लिए इसके लक्षणों को गंभीरता से समझना बहुत जरूरी होता है क्योंकि इनको समझने के बाद हमारे लिए यह जानना आसान हो जाता है कि कब मेडिकल सहायता अत्यंत जरूरी हो जाती है। दस्त से निर्जलीकरण हो सकता है, जिससे बच्चे का हाइड्रोइलेक्ट्रोलाइटिक संतुलन (पानी, सोडियम, पोटेशियम, क्लोरीन) प्रभावित होता है और अगर तुरंत इलाज न किया जाए, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं। इस लेख में, मैं आपको एक साल से बड़े बच्चों को दस्त लगने के कारण और कुछ घरेलू उपचारों के बारे में बताना चाहूंगी।
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दस्त के कारण
अक्सर, दस्त एक वायरस, जीवाणु या परजीवी के कारण होता है जो भोजन, पानी या दूषित वस्तुओं का सेवन करने से बच्चे के पाचन तंत्र में प्रवेश करता है।
दस्त, किसी भोजन या दवा की एलर्जी, फल के रस की बड़ी मात्रा या अस्वास्थ्यकर खाद्य संयोजनों का खपत से भी हो सकता है।
दस्त के लिए घरेलू उपचार
1ओ.आर.एस का घोल
हम जानते है कि पानी में पर्याप्त लवण और पोषक तत्व नहीं होते, इसलिए बच्चे को दस्त लगने ओ.आर.एस का घोल देना बहुत जरूरी होता है। अपने बच्चे को पूरे दिन नियमित अंतराल पर ओ.आर.एस का घोल देना बहुत जरूरी होता है। यह किसी भी मेडिकल स्टोर या डिस्पेंसरी से आसानी से मिल जाता है।
आप चाहे, तो इसे घर पर भी बना सकती है। इसे बनाने के लिए एक लीटर पानी में 6 चम्मच चीनी, एक चम्मच नमक मिलाकर, पुरे मिश्रण को तब तक उबालें, जब तक चीनी और नमक पूरी तरह से घुल न जाए। इस घोल को ठंडा करके अपने शिशु को दें।
2अदरक + शहद + जीरा + दालचीनी का मिश्रण
एक चम्मच अदरक पाउडर, थोड़ा दालचीनी पाउडर, थोड़ा जीरा पाउडर और एक चम्मच शहद लें। इस मिश्रण को दिन में तीन बार अपने बच्चे को दें। यह मिश्रण न केवल दस्त को रोकता है, बल्कि उन सभी बैक्टीरिया या परजीविओं को खत्म भी करता है, जो पेट के संक्रमण का कारण होते हैं।
3केला
केला सबसे अच्छी चीज हैं क्योंकि केले में पोटेशियम और पेक्टिन होता है जो दस्त का बहुत ही बढ़िया इलाज है। यदि आपका बच्चा दस्त से पीड़ित है, तो आप अपने बच्चे को मसला हुआ केला दे सकते हैं। अधिकतम लाभ के लिए, अगर संभव हो, तो मसले हुए केले को दही के साथ दें, इससे और भी ज्यादा लाभ होगा।
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4चावल का पानी
उबले हुए सफेद चावलों का पानी दस्त रोकने के लिए बहुत ही चमत्कारी उपचार है। इसके लिए उबलते हुए चावलों पर और अधिक पानी डालें और जब चावल अच्छी तरह से उबल जाएं, इनको मसल लें और पानी को अच्छे से छानकर एक गिलास में निकल लें। इसमें एक चुटकी नमक डालकर अपने बच्चे को दें। सही मात्रा के लिए एक बार अपने बाल रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क कर लें।
5दही
वैसे तो कुछ लोगों का मानना है कि दस्त के दौरान दूध से बने उत्पाद नहीं देने चाहिए, फिर भी दही एक बहुत ही बढ़िया इलाज है। दस्त के दौरान अपने बच्चे को दही दें। आप चाहें, तो इसमें भुना हुआ जीरा, आधा चम्मच चीनी और स्वादानुसार नमक भी मिला सकते हैं। यह दही बच्चे को देने से उसे बहुत लाभ होगा।
6अदरक की चाय या कैंडी
अदरक में प्राकृतिक एंटीस्पाज्मोडिक, जीवाणुरोधी और सुखदायक गुण होते हैं। यह पेट की ऐंठन को शांत करता है, मतली को कम करता है और निर्जलीकरण को रोकता है। दस्त लगने पर तुरंत राहत के लिए अपने बच्चे को अदरक वाली कैंडी या चाय दें।
7उबले हुए सेबों की चटनी
क्या आप जानते थे कि उबले हुए सेबों की चटनी दस्त के लिए एक प्राकृतिक उपचार है? सेब में पेक्टिन की महत्वपूर्ण मात्रा होती है, जो दस्त से लड़ने और शरीर में खनिजों और लवण के स्तर को संतुलित करने में एक आवश्यक घटक होता है। इस चटनी को बनाना बहुत ही आसान है। इसे बनाने के लिए आपको कुछ सेब लेने हैं। इसे अच्छे से धोकर पानी में उबाल लेना है और तब तक हिलाते रहना है जब तक यह नरम और पचाने में आसान न हो जाए। इसे चटनी के रूप में बच्चे को देना है। इससे बच्चे को बहुत फायदा होगा।
8साबूदाने का पानी
दस्त के दौरान साबूदाने का पानी भी बहुत फायदेमंद होता है। इसे बनाना बहुत आसान है। पानी में 1 घंटे के लिए साबूदाना सोखें। फिर पर्याप्त पानी डालकर इसे अच्छे से उबाल लें। इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक कि साबूदाना पूरी तरह से पानी में घुल न जाए। घुल जाने के बाद, इस छान लें और इस पानी को अपने बच्चे को दें।
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किन हालातों में आपको डॉक्टर से मिलना जरूरी होगा
हालांकि दस्त बहुत गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन यह निम्नलिखित स्थितियों में बहुत खतरनाक हो सकता है:
- जब यह लगातार 3 दिनों तक रहे।
- जब दस्त के साथ पेट में तीव्र दर्द भी होता है।
- जब बुखार 100.4°F से ऊपर पहुंच जाता है।
- जब शौच में रक्त, पस, श्लेष्म इत्यादि जैसे पैथोलॉजिकल तत्व दिखाई दें।
- जब निर्जलीकरण के संकेत नजर आने लगे।
अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।
इन सभी मामलों में, एक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करने में संकोच न करें। इन मामलों में दस्त की समस्या अत्यधिक खतरनाक हो सकती है। वैसे भी, घरेलू उपचारों के साथ-साथ डॉक्टर से परामर्श कर लेना बढ़िया होता है।
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