
यदि आप पहली बार माता-पिता बने हैं, तो आप अचानक खुद को एक नई दुनिया मे महसूस कर रहें होंगे। एक अनमोल जीवन के जन्म के बाद, माता-पिता के रूप मे आपका एकमात्र लक्ष्य, अपने नए सदस्य को एक बेहतरीन परवरिश देना ही रह जाता है।
एक माँ होने के नाते, जब पहली बार मैने अपने नवजात शिशु को गोद मे उठाया था, मुझे याद है कि मैं इस ज़िम्मेवारी के लिए तैयार नहीं थी और बहुत ज़्यादा डरी भी हुई थी। जब मैं अपने नवजात शिशु के साथ पहुँची तो मुझे आज भी याद है कि किस तरह से मुझे मेरी मां, दोस्तों, और पड़ोसियों आदि ने अनगिनत सुझाव दिए थे। जब भी कोई मेरे शिशु को देखने आता था, मुझे सलाह देता था कि मुझे अपना बच्चे के साथ क्या करना चाहिए और क्या नहीं। कुछ सुझाव तो बहुत मददगार साबित हुए और कुछ व्यर्थ थे। उनमे से कुछ सुझाव जो बहुत ही उपयोगी साबित हुए, मैं आपसे बाँटना चाहूँगी। असल मे नए माता-पिता कुछ लोगों के कहने पर, अक्सर रूढ़िवादी तरीके अपनाने लगते है। इस लेख के ज़रिए मैं कुछ गलतियाँ जो नए माता-पिता पहले वर्ष में करते हैं, के बारे में बताना चाहूँगी और कहना चाहूँगी कि जितना हो सके इन ग़लतियों को ना दोहराए।
प्रैम (Pram)
मेरे बच्चे के लिए सबसे पहला उपहार एक प्रैम था। मैं मानती हूँ कि मेरे पति ने मुझे कहा था कि मैं अपने बच्चे को इसकी आदत ना डालु और बच्चे को सुलाने के लिए तो इसका इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करू। पर मैने उनका सुझाव तब तक नहीं माना जब तक मुझे खुद यह एहसास नही हुआ कि यह एक गलत अभ्यास था।
लगभग सभी नए माता-पिता इस तरह की ग़लती करते है; वो अपने बच्चे को प्रैम मे लिटा कर, प्रैम को आगे-पीछे धक्का देकर, अपने बच्चे को सुलाने की कोशिश करते है। भले ही शिशु सो जाता है पर वो नही जानते की जाने-अनजाने वो अपने शिशु को प्रैम का आदि बना रहे है। शायद आप नहीं जानते कि शिशु आपके इन तरीको का बहुत जल्दी आदि हो जाएगा और उसको आनंद भी आने लगेगा। एक समय के बाद, आपका शिशु, आपकी इन रणनीतियों के बिना सो ही नही पाएगा।
इसलिए, यदि आप बच्चे को इस तरह से सुला रहीं है, तो यह जान लें कि आपका बच्चा आपके इन तरीको का और प्रैम का गुलाम बन कर रह जाएगा।
शिशु के सोने के समय के बारे मे
मुझे बहुत सारी औरतों यह कहती थी कि मुझे अपने शिशु को दिन मे खेल मे लगाए रखना चाहिए ताकि वो रात को थक कर ठीक से सो जाए। बहुत से औरतें ऐसा ही करती है। पर यह एक दम ग़लत कदम है। आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि यदि आपका शिशु दिन के दौरान जागता रहता है तो वह रात को सोता रहेगा। बच्चो के केस मे यह विपरीत है; यदि आपका बच्चा दिन मे अच्छी तरह सोता है, तो वह रात मे भी अच्छी तरह से सोएगा।
बच्चों की भाषा मे बात न करें
बेवकूफ मत बने और अपने नवजात शिशु के साथ बात करते वक़्त बिना मतलब के शब्दों का प्रयोग ना करे। विभिन्न अध्ययनों ने यह सिफारिश की है कि जब आप सामान्य रूप से बोलते हों तो आपके बच्चे ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते है। हालांकि, इस नियम को सख्ती से पालन करना भी कोई बहुत जरूरी नहीं है। यदि आपका बच्चा आपकी कुछ बच्चो जैसे हरकतों पर या शब्दों के इस्तेमाल पर हंसता हैं, तो उनको बच्चे के मनोरंजन के लिए सामान्य तौर पर ही उपयोग करें। अन्यथा, सही शब्दों का उपयोग करके ही अपने बच्चे से बात करें।
बच्चे का स्नान
अनगिनत मेडिकल लेखों और अध्यन्नों की प्रमाणिकता के बाद भी, कुछ नए माता-पिता मानते हैं कि नवजात शिशु को रोज़ नहलाना चाहिए। पर यह एक गलत अभ्यास है। अगर आप हर रोज़ अपने बच्चे को स्नान नहीं करवा रहे हैं तो इसमे कुछ भी ग़लत नहीं है। ध्यान रखें, रोजाना स्नान करवाने से आपके बच्चे की कोमल त्वचा को नुकसान हो सकता। इसके साथ, यह तो आप जानती ही होंगी कि गर्भनाल झड़ने तक तो आपको अपने शिशु को स्नान नहीं करवाना है; सिर्फ़ गीले कपड़े से उसको साफ कर देना है।
रात के समय स्तनपान करने के लिए बच्चे को जगाना ठीक नहीं होता
आसपास की कई महिलाओं ने मुझे बताया कि मुझे आधी रात को भी अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए जगा लेना चाहिए क्योंकि बच्चे को हर दो घंटे बाद दूध देना जरूरी होता है। परंतु मेरे बाल रोग विशेषज्ञ ने मुझे बताया कि रात के दौरान स्तनपान कराने के लिए अपने बच्चे को जगाना ठीक नहीं होता क्योंकि दूध से जरूरी बच्चे की नींद है। साथ ही उसने यह भी बताया कि अगर बच्चा भूखा होगा तो वह खुद ही जाग जाएगा।
एक अतिसक्रिय (ओवरएक्टिव) माता-पिता ना बने क्योंकि यह आपको और आपके बच्चे को बाद मे परेशान करेगा। अच्छे और बुरे व्यवहारों के बारे मे आपके जो भी संदेह हो, उनको दूर कर ले और अपने छोटे से शिशु को एक बेहतरीन परवरिश दे।
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