A Few Home Made Energy Boosters You Must Give Your Child
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Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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जब बच्चे की सेहत की बात आती है, तो माता-पिता होने के नाते, हम उनको सब कुछ बढ़िया ही देना चाहेंगे। माध्यम चाहे टेलीविज़न हो, अख़बार हो, पत्रिकाएं हों या दुकानों में टंगे बोर्ड, हर जगह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़े उत्पादों की भरमार है। लेकिन, सवाल यह है कि क्या यह उत्पाद वास्तव में फायदेमंद हैं या नहीं ? इन सवालों को ध्यान में रखते हुए, आज हम बच्चों को दिए जाने वाले पेय पदार्थों पर चर्चा करेंगे और आपको बताएंगे कि बच्चों को ऊर्जा वृद्धि के लिए कौन से पेय पदार्थ देने चाहिए और कौन से बिलकुल नहीं

बच्चों को ऊर्जा वृद्धि के लिए कौन से पेय पदार्थ देने चाहिए?

पानी

बच्चों के लिए सबसे पहला महत्वपूर्ण पेय पदार्थ है, पानी। आप जानते ही होंगे कि बच्चे बहुत आसानी से निर्जलीकरण का शिकार हो जाते हैं। इसके लिए उन्हें धूप में निकलना भी जरूरी नहीं है। वह अपने रोजाना की गतिविधि जैसे कि होमवर्क करते हुए, पार्क में खेलते हुए, या फिर घर में भागते दौड़ते हुए भी इस समस्या का शिकार हो जाते हैं।

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माता-पिता के रूप में, आपको उन्हें नियमित रूप से पानी पिलाते रहना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि निर्जलीकरण तंत्रिका कोशिकाओं को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है और इसकी वजह से बच्चे में थकान, खराब एकाग्रता और मूड स्विंग जैसे लक्षण नज़र आने लगते हैं। बच्चा प्यासा न रहे, इसलिए उसके पानी पीने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें। बच्चे को हमेशा पानी की साथ रखने के लिए प्रोत्साहित करें।

दूध

बच्चों के लिए दूध दूसरा सबसे बेहतरीन पेय पदार्थ है क्योंकि इसमें बहुत सारे विटामिन और खनिज होते हैं और इसके सेवन से दांत भी खराब नहीं होते। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को पूरे फैट वाला दूध नहीं देना चाहिए। 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्किम मिल्क देना ठीक रहता है क्योंकि वह आहार विविधीकरण प्रक्रिया से गुजर रहे होते हैं और ऐसा न हो की पूरे फैट वाला दूध पीकर उनका पेट भर जाए और वह कुछ अन्य खाने से मना कर दें।

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अगर बच्चे को दूध का स्वाद पसंद न आए, तो आप वेनिला, स्ट्रॉबेरी इत्यादि जैसे फ्लेवर मिलाकर दे सकते हैं। पर ध्यान रखें, इनको मिलाने के बाद दूध में चीनी का स्तर बढ़ जाता है, अतः बच्चे को यह मीठे पेय नियमित मात्रा में ही देने चाहिए। जब भी आप बच्चे को दूध देते हैं, तो उसे साथ में कुछ खाने को जरूर दें।

फलों के रस

ध्यान रखें, हर बच्चे को इस तरह से बनाया गया ताजा फलों का जूस पहली बार में पसंद नहीं आता। परन्तु थोड़ी सी मेहनत के बाद आप उनको यह जूस पिलाने में अवश्य कामयाब हो जाएंगे। सबसे बढ़िया बात यह है कि घर के जूस में कोई मिलावट नहीं होती। लेकिन, फलों की तरह, इनके रस में चीनी का स्तर ज्यादा हो सकता है, इसलिए इन्हें ज्यादा न दें।

इसके विपरीत, इनके विकल्पों का इस्तेमाल करें। सबसे बढ़िया विकल्प है दो या दो से अधिक फलों को मिलाकर बनाया गया रस जैसे कि सेब और गाजर का रस, केले का शेक, गाजर और संतरे का रस, क्रैनबेरी, रास्पबेरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी को मिलाकर बनाया गया रस, कीवी, सेब , टमाटर, आड़ू और केले को मिलाकर बनाया गया शेक, या फिर संतरे का जूस।

कौन से पेय पदार्थ बिलकुल नहीं देने चाहिए

डिब्बा बंद जूस

बहुत से लोग डिब्बा बंद जूस देना पसंद करते हैं क्योंकि उनको लगता है कि डिब्बा बंद जूस ज्यादा बेहतर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डिब्बा बंद जूस का असली जूस से कुछ भी लेना देना नहीं है।

इस तथ्य को समझने के लिए खुद से एक साधारण सा सवाल पूछें। क्या कभी आपने सोचा है कि जब आप घर में फलों का जूस निकालते हैं, तो हर बाद स्वाद अलग हो जाता है, लेकिन जब आप डिब्बा बंद जूस लेते हैं, तो हर बार स्वाद एक जैसा ही होता है। ऐसा क्यों? इस बात को गहराई से समझने के लिए, आपको डिब्बा बंद जूस को बनाने का फार्मूला समझना होगा।

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डिब्बा बंद जूस बनाने के लिए पहले संतरों को निचोड़ा जाता है, फिर उस जूस को एक विशाल कंटेनर में संग्रहीत किया जाता है, जिसमें से ऑक्सीजन को निकाल लिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि जूस एक साल तक ख़राब न हो और ऐसा करने के कारण ही यह जूस स्वाद रहित हो जाता है। इसलिए, इस जूस को बेचने से पहले इसमें कृत्रिम स्वाद डाले जाते हैं।

हालांकि डिब्बा बंद जूस बनाने वाली हर कंपनी उसमें 100% जूस होने का दावा करती हैं, फिर भी क्या कभी आपने सोचा है कि कैसे किसी एक कंपनी के डिब्बा बंद जूस का स्वाद, दूसरी कंपनी के डिब्बे बंद जूस से अलग होता है? रस के प्रत्येक ब्रांड का अपना स्वाद होता है। हैरानी की बात यह है कि इन डिब्बा बंद जूस में स्वाद बनाने के लिए क्या डाला जाता है, इनके बारे में कोई भी ब्रांड डिब्बे पर कुछ नहीं लिखता और यह जानते हुए कि इन डिब्बा बंद जूसों का वास्तविक जूस से कोई लेना-देना नहीं है, हम इनका सेवन बढ़-चढ़ कर करते हैं। जबकि अच्छी सेहत के लिए, हमें अपने बच्चे को यह जूस बिलकुल नहीं देने चाहिए।

कार्बोनेटेड पेय

कार्बोनेटेड पेय के सेवन से अपने बच्चों को दूर रखें क्योंकि इनमें चीनी बहुत अधिक मात्रा में होती है और पोषक तत्व बहुत कम। इसके साथ इनसे कैलोरी में भी वृद्धि ही होती है। इसलिए जितना हो सके, इन पदार्थों के सेवन से अपने बच्चों को दूर रखें।

अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।

अंत में हम आपसे यही कहना चाहेंगे कि बच्चों को दिए जाने वाले पेय पदार्थों का खास ध्यान रखें। आकर्षक पैकिंग के चक्कर में ऐसा कोई भी पेय पदार्थ न दें, जिससे बच्चे को आगे चलकर नुकसान हो।

आप अपने बच्चे को ऊर्जा वृद्धि के लिए कौन से पेय पदार्थ देते हैं? इस विषय में आपके सुझावों और प्रश्नों का हमें इंतज़ार रहेगा।

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