
कई महिलाएं यह सवाल पूछती हैं, 35 या उससे अधिक की आयु के बाद गर्भवती होने पर, ऐसी कौन से शारीरिक या मानसिक विकार हैं , जो उनको या उनके होने वाले बच्चे को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर सकते हैं? तो, आज मैं इस विषय के बारे में बात करना चाहती हूं।
1पेरिपर्टम कार्डियोमायोपैथी (peripartum cardiomyopathy)
हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि जो महिलाएं 35 के बाद गर्भधारण करती हैं उनको पेरिपर्टम कार्डियोमायोपैथी (peripartum cardiomyopathy) जैसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यह गर्भावस्था से जुड़ी एक ऐसी दुर्लभ जटिलता है, जिससे ग्रस्त महिलाओं में से 85% से ज़्यादा महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।
आपकी जानकारी के लिए कार्डियोमायोपैथी हृदय की उन मांसपेशियों की एक असामान्यता है, जो रक्त पम्पिंग की कार्रवाई को बढ़ाती और कम करती है। द्रव के साथ भरने वाले फेफड़े इस रोग का एक आम लक्षण है। इस जटिलता से श्वास लेने में गंभीर समस्या हो जाती है और इसी वजह से गर्भवती महिलाएं एक दम परेशानी में आ जाती हैं।
ज़रूर पढ़े – गर्भावस्था सम्बन्धी कुछ सुझाव – जो शायद आपको कहीं और नहीं मिलेंगे
2प्रजनन क्षमता में कमी
हर महिला एक सीमित अण्डों के साथ जन्म लेती है। इसलिए, उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में कमी आना एक आम समस्या है। चिकित्सकीय रूप से, एक महिला जब 30 वर्ष की आयु तक पहुँचती है, तो उसमे ओवेरियन रिजर्व का केवल 12% ही रह जाता है और जब वह 40 तक पहुंचती है तब यह रिजर्व गिर कर 3% पर पहुँच जाता है। इसलिए, यदि आप 35 से ऊपर हैं और आपको असुरक्षित यौन संबंध के 6 महीने बाद भी गर्भधारण के समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से ज़रूर मिल लेना चाहिए।
3हार्मोनल परिवर्तनों के कारण थकान
35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं को पेश आने वाली दूसरी सबसे बड़ी समस्या थकान होती है। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तन की वजह से महिलाओं का खुद को थका हुआ महसूस करना आम बात है, लेकिन एक उम्र के बाद महिलाओं में थकान अधिक स्पष्ट हो जाती है और अगर गर्भवती महिलाओं को घर में मौजूद अन्य छोटे बच्चों से भी निपटना पड़ता है, तो उनकी थकान और बढ़ जाती है।
4आंतरिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे बवासीर इत्यादि
यदि आपके पास पहले से एक बच्चा है, तो 35 के बाद गर्भधारण करने की वजह से आपको बवासीर , मूत्राशय पर बढ़ा हुआ दबाव, गर्भाशय, योनि और स्तनों के साथ जुड़ी अन्य शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पढ़ सकता है। इसका कारण यह है कि इन क्षेत्रों में मांसपेशियों और अन्य ऊतक पहले से ही फैले हुए होते हैं। आप गर्भावस्था के दौरान सामान्य व्यायाम और खासतौर पर किगल एक्सरसाइज करके इन समस्याओं से होने वाले दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ये व्यायाम योनि की मांसपेशियों की ताकत में सुधार के लिए अच्छे हैं।
5जुड़वां बच्चों के होने की अधिक संभावना
उम्र और गर्भधारण की पिछली संख्या के साथ जुड़वा बच्चों के होने की आशंकाएं बढ़ जाती है। इन आशंकाओं का एक कारण निर्धारित उम्र के बाद प्रजनन की सहायता के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीकें भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वे ओवरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन विधियों का उपयोग करते हैं, जो एक से अधिक गर्भावस्था धारण करने के प्रमुख कारण बनते हैं।
ज़रूर पढ़े – गर्भस्राव क्या है, क्यों है, इसके शुरुआती लक्षण और उपचार
6गर्भस्राव का खतरा ज़्यादा होता है
दुर्भाग्य से, 35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने वाली एक-तिहाई महिलाओं को गर्भस्राव से गुज़रना पड़ता है। ऐसा होने के कई कारण होते हैं जैसे कि अण्डों का अपूर्ण होना, गर्भाशय की परत काफी मोटी न होना, गर्भाशय से मिलने वाला रक्त का गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होना, इत्यादि।
7बच्चों में जन्म दोषों का जोखिम भी अधिक होता है
35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं को पैदा होने वाले बच्चों को निर्धारित (2.5 किग्रा से नीचे) से कम वज़न के पैदा होने का खतरा बना रहता है। इस आयु सीमा के बाद गर्भवती महिलाओं को पैदा होने वाले बच्चों में जन्म दोषों का जोखिम भी दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक होता है। 35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं को जन्मे बच्चों में डाउन सिंड्रोम और क्रोमोसॉमल असामान्यताओं की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती हैं। डाउन सिंड्रोम एक आजीवन स्थिति है, जिससे प्रभावित बच्चे में चेहरे की विरूपता, बौद्धिक विकलांगता, और विकास संबंधी देरी इत्यादि जैसे विकारों का होना बहुत स्वाभाविक होता है। उनका अनुपात एक प्रकार है –
- 25 वर्षों में – 1: 1250
- 30 वर्षों में – 1: 1000
- 35 वर्षों में – 1: 400
- 40 वर्षों में – 1: 100
- 45 वर्षों में – 1: 30
- 49 वर्षों में – 1: 10
8सिजेरियन डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है
35 की उम्र के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं में लेबर से जुड़ी समस्याओं का ज़्यादा होना भी आम है। खासकर यदि आप पहली बार गर्भवती हो रही हैं। इससे प्लेसेंटा प्राइविया (ऐसी स्थिति जिसमें नाल गर्भाशय ग्रीवा को ढक लेता है) का खतरा बढ़ जाता है।
थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल के साथ चीजें बेहतर हो सकती हैं। 35 की उम्र के बाद गर्भधारण से पहले इससे संबंधी परामर्श आपको निश्चित रूप से मदद कर सकता है।
ज़रूर पढ़े – ऑटिज़्म के कारण क्या हैं और गर्भावस्था के दौरान किन चीज़ों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए
आपका डॉक्टर उन स्थितियों और जोखिम कारकों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो आपके स्वास्थ्य पर या आपकी गर्भावस्था पर प्रभाव डाल सकते हैं। मेरे अगले लेख में, मैं इन के बारे में ही बात करूंगी।
Do you need more help?
क्या आपको और मदद चाहिए?
- Write a Comment
- Write a Review
- Ask a Question
Be kind to others. False language, promotions, personal attacks, and spam will be removed.Ask questions if any, by visiting Ask a Question section.
दूसरों के प्रति उदार रहें, अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें और किसी भी तरह का प्रचार ना करें।
यदि कोई प्रश्न हो तो, अपना प्रश्न पूछें सेक्शन पर जाएं।
सबसे पहले अपना अनुभव बाँटे।



