What Are The Complications After Normal Delivery
What Are The Complications After Normal Delivery
Photo Credit: Bigstockphoto

Simranjit Kaur

Mother of one, Master of Education with specialization in child-psychology. After becoming mother, I met with real me. I am now learning new concepts of parenting every fresh day and sharing my experiences with other mothers. I believe, one of the most important things that you, as a parent, should work on is - your child's psychology. Understanding the child-psychology will help you build stronger bonds and know them better.

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यह एक आम गलत धारणा है कि केवल सिजेरियन डिलीवरी के बाद ही माँ को शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सच तो यह है कि नार्मल डिलीवरी के बाद भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन थोड़ी सी चिकित्सा और मेडिकल सूझबूझ का प्रयोग करके, खुद को नार्मल डिलीवरी के बाद होने वाली इन समस्याओं से बचाया जा सकता है। इस लेख में हम नार्मल डिलीवरी के बाद पेश आने वाली समस्याओं और उनके उपचारों पर चर्चा करेंगे।

निस्संदेह, गर्भवती होना एवं गर्भावस्था के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार करके, एक सेहतमंद शिशु को जन्म देना, हर महिला के लिए एक अद्वितीय एवं ऐतिहासिक अनुभव होता है। शिशु का जन्म मातृत्व की भूमिका का पहला अध्याय है। बच्चे के दुनिया में आने के ठीक बाद से पेरेंटिंग शुरू हो जाती है और पेरेंटिंग की वजह से आपके जीवन में भी कई तरह के मानसिक एवं शारीरिक बदलाव आते हैं। इन बदलावों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करके, आप खुद को पहले से ही तैयार कर सकते हैं।

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आइए, अब हम जन्म के बाद एक माँ को पेश आने वाली आम जटिलताओं के बारे में बात करते हैं।

पेरिनियम में दर्द

योनि और गूदे के बीच के क्षेत्र को पेरिनियम कहा जाता है। यह क्षेत्र अक्सर प्रसव के दौरान फैलता है और टूट जाता है। इसी वजह से आपको एपिसियोटमी अर्थात प्रभावित क्षेत्र की सिलाई (टांकों) की आवश्यकता होती है। यह काफी पीड़ाजनक होती है, खासकर जब आपको इसके बाद (स्तनपान इत्यादि के लिए) उठकर बैठना पड़ता है। भले ही यह दर्द थोड़े समय तक ही रहता है और क्योंकि आपको स्तनपान करवाना होता है, इसलिए आपको एनाल्जेसिक लेने की अनुमति नहीं दी जाती।

ज़रूर पढ़े – सिजेरियन के बाद स्तनपान करवाने से जुड़े कुछ सवाल

टांकों की वजह से होने वाली पीड़ा से बचने के लिए आपको (बैठने एवं स्तनपान करवाने के लिए) खुद ही अपने लिए एक आरामदायक स्थिति ढूंढनी पड़ती है। आप ऐसी स्थिति में विशेष रूप से स्तनपान के लिए बनाए गए तकिये का इस्तेमाल कर सकती हैं। जल्दी रिकवरी के लिए आप “स्ट्रेचिंग वाली कसरतों” का सहारा ले सकते हैं। इन कसरतों का जितना अभ्यास करेंगे, उतना ही आपके लिए बढ़िया रहेगा।

स्तनों की सूजन

चाहे आपकी नार्मल डिलीवरी हुई हो या सीज़ेरियन, स्तनों में सूजन, जन्म के बाद होने वाली एक आम जटिलता है। यह एक स्तन संक्रमण है, जो तब होता है जब स्तनपान करवाने से स्तनों में पड़ने वाली दरारों के माध्यम से बैक्टीरिया स्तन ऊतकों में प्रवेश करता है। मास्टिटिस (स्तनों की सूजन) के अधिकांश मामलों में, जीवाणु संक्रामक नहीं होते, इसलिए आप स्तनपान जारी रख सकते हैं। लेकिन, संक्रमण बेहद दर्दनाक होता है।

ज़रूर पढ़े – स्तनपान के दौरान होने वाली पीड़ा और उससे जुड़ी कुछ समस्याएं

इस संक्रमण के साथ-साथ आपको बुखार भी हो सकता है। इस संक्रमण का उपचार हल्के एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। इस्तेमाल के बाद भी बच्चे को स्तनपान करने से कोई परेशानी नहीं होती।

गर्भाशय संक्रमण

बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग हो जाता है और जन्म के 20 मिनट बाद इसे पूरी तरह (योनि) से बाहर निकाल दिया जाता है। फिर भी, दुर्भाग्यवश अगर प्लेसेंटा के टुकड़े गर्भाशय में रह जाएं, तो यह गर्भाशय संक्रमण का कारण बन जाते हैं।

इस संक्रमण के लक्षण, ठंड लगना, मध्यम बुखार, सफेद रक्त कोशिकाओं में वृद्धि, गर्भाशय की सूजन, पेट में अकड़न आदि होते हैं। यदि यह संक्रमण गर्भाशय की दीवार तक फैल जाता है, तो इससे पेट में दर्द, बदबूदार मूत्र, गंधयुक्त डिस्चार्ज और तेज बुखार हो सकता है। संक्रमण के इलाज एंटीबायोटिक से किया जाता है। अगर समय रहते उपचार नहीं किया जाता, तो यह विषाक्त शॉक सिंड्रोम का कारण बन सकता है।

जन्म के बाद डिप्रेशन

एक बच्चे के जन्म के बाद, मां नई जिम्मेदारियों से खुद को अतिभारित महसूस करती है। इसी वजह से, माँ को कई बार डिप्रेशन का सामना भी करना पड़ता है। कई मामलों में, शिशु को जन्म देने के कुछ महीनों बाद तक भी, एक माँ को डिप्रेशन के अलावा, गुस्सा, चिड़चिड़ापन एवं चिंता जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। यह समस्याएं उन महिलाओं में आमतौर पर देखी जाती हैं, जो पहली बार माँ बनी हैं।

ज़रूर पढ़े – शिशु के जन्म के बाद माँ के शरीर में आने वाले परिवर्तनों के बारे में

इसका उपचार संभव हैं, लेकिन उपचार से पहले आपको यह समझना बहुत जरूरी है कि आप वास्तव में एक समस्या से गुजर रहीं हैं। समस्या के समाधान के लिए आप पारिवारिक सहायता ले सकती हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में अपनों की मदद बहुत लाभप्रद होती है। इसके साथ ही, काउन्सलिंग के सेशन लेना भी न भूलें।

कई अन्य संभावित जटिलताएं

इन समस्याओं के अलावा भी कई अन्य संभावित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

    1. मूत्र संक्रमण के कारण आपको किडनी के संक्रमण का भी सामना करना पड़ सकता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार या कब्ज जैसी समस्याएं भी इस संक्रमण की ओर इशारा करती हैं। संक्रमण के इलाज और इसे फैलाने से रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स का सहारा लिया जाता है।
    2. स्तनों के मामले में, आपको अवरुद्ध नलिकाओं की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें गर्म संपीड़न के साथ ठीक किया जाता है।
    3. जन्म के बाद, कई महिलाएं बाल झड़ने की शिकायत करती है। उनके मुताबिक, शिशु के जन्म से पहले उनके बाल बहुत ज्यादा थे, और जन्म के बाद झड़ गए। वास्तव में, यह हार्मोनल रीबैलेंसेंसिंग, जो शिशु के जन्म के कुछ महीनों के भीतर होता है, के कारण होता है।
    4. शिशु के जन्म के बाद, एक माँ को मूत्र असंतुलन, सेक्स के दौरान दर्द, एवं स्ट्रेच मार्क्स जैसी समस्यााओं का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन यह सभी समस्याएं समय के साथ ठीक हो जाती हैं।

अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।

कुछ ऐसी समस्याएं जिनके बारे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए
  1. बहुत ज्यादा डिप्रेशन महसूस होने या मन में आत्महत्या जैसे विचार आने पर, आपको तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
  2. अगर योनि रक्तस्राव में कोई असामान्यता (जैसे कि अजीब रंग) नजर आए, या फिर जन्म के दो सप्ताह बाद भी रक्तस्राव बंद न हो, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए क्योंकि ऐसा न करना मां के जीवन को खतरे में डाल सकता है।
  3. शिशु के जन्म के बाद अगर आपको लगातार बुखार और खांसी के साथ-साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  4. अगर आपके स्तन स्पर्श करने मात्र पर भी दर्द होने लगे या फिर लाल रंग के एवं सूजे हुए नजर आने लगे, तो आपको बिना समय बर्बाद किए किसी विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

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