
इस लेख में
- पेट का दर्द और गैस की समस्या
- ग्राइप वॉटर का फ़ॉर्मूला
- ग्राइप वॉटर सुरक्षित है या नही
पेट का दर्द और गैस की समस्या नवजात शिशुओं के लिए सबसे ज़्यादा तकलीफ़देह होता है। पर आपको जानकर हैरानी होगी कि इन दोनो समस्याओं का कारण आपके स्तनपान करवाने का तरीका, खाते या पीते वक़्त मुँह में जाने वाली हवा, या गड़बड़ाई हुई पाचन क्रिया होती है। इस स्तिथि में बहुत सी माताएँ “ग्राइप वॉटर” पर भरोसा करती है। आइए जानते है “ग्राइप वॉटर” के बारे में।
ग्राइप वॉटर का अविष्कार इंग्लेंड के डॉक्टर विलियम वूद्वर्थ ने 1800 सदी के आसपास किया था। तब से लेकर आज तक, यह बहुत से माताओं के भरोसा जीत चुका है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है। पुराने समय में माताओं का मानना था की ग्राइप वॉटर से उनके बच्चे को पेट दर्द और गैस की समस्या से काफ़ी आराम मिला है। पर आजकल की माताओं का मानना है कि ग्राइप वॉटर से भी उनके बच्चे को इन तकलीफ़ों से आराम नही मिला है। पर यह सवाल मैं अक्सर पूछती हूँ कि क्या ग्राइप वॉटर सुरक्षित है या नही?
सबसे पहले ग्राइप वॉटर के फ़ॉर्मूला को समझ लेते है। ग्राइप वॉटर को शुरुआत मे कुछ चीज़े जैसे कि सोयाबीज का पानी, शराब, सोडियम बाइकार्बनेट के साथ साथ कई सारे और पदार्थ मिला के बनाया गया था। माना जाता था की सोयाबीज गैस को ठीक करने के लिए अहम भूमिका निभाता था, पर असल में बच्चे को चुप करवाने में उसके बीच पाई जाने वाली शराब भी एक ख़ास किरदार निभाती थी।
आजकल ऐसी चीज़ो के निर्माण के लिए खास क़ानून बनाए गये है और इनको नियंत्रित करने वाली कंपनीज़, ग्राइप वॉटर में शराब का इस्तेमाल करने की इज़ाज़त नही देती। शायद इसी वजह से आज कल बच्चों को ग्राइप वॉटर देने के बाद भी कोई आराम नही मिलता।
अगर आप हम से पूछेंगे कि ग्राइप वॉटर सुरक्षित है या नही, तो हमारा जवाब इसके हक़ में नही जाएगा; यह सुरक्षित नहीं है और हमारे ऐसा मानने के कारण कुछ इस प्रकार है।
सबसे पहला कारण है – वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन का वो ब्यान जिसमे उसने पुरजोर यह कहा है की पहले 6 महीने अपने शिशु को माँ के दूध के बिना कुछ भी ना दे। पहले 6 महीने के दूध का असर और लाभ बच्चे को सारी उमर तक मिलेगा। जहाँ यह दूध माता और शिशु में एक खास किस्म का बंधन बांधता है वही बच्चे को अनेकों जानलेवा बीमारियों से निज़ाद दिलाता है। इसके सस्सत ही माँ का दूध बचे के आई क्यू के लिए भी बहुत ज़रूरी है।
जैसा की हमने पहले बताया क़ि पुराने समय में ग्राइप वॉटर में शराब का इस्तेमाल होता था, जिस पर आज कल पाबंदी है। इस कमी को पूरा करने के लिए आज कल ग्राइप वॉटर बनाने वाली कंपनीज़, शुगर (चीनी) का भरपूर इस्तेमाल करती है। और यह बताने की शायद कोई आवश्यकता नहीं है कि शुगर का शिशु के शरीर पर और आने वेल दाँतों पर क्या असर पड़ता है।
ग्राइप वॉटर से बेहत कई और विकल्प भी उपलब्ध है जैसे कि अपने शिशु को डकार दिलवाना, दूध पिलाने के बाद उसको कंधे पे उठा लेना, उसको पे के बाल उल्टा लिटा देना (ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा “पेट की गैस की समस्या से निज़ाद” लेख पड़ें); जैसे कई उपाए हैं। इनके साथ-साथ माताएँ अपने शिशु को स्तनपान करवाने के तरीक़ो को भी जाँचे। स्तनपान की पोज़िशन ऐसी हो जिससे बच्चे के मुँह में हवा ना जाए।
सबसे जरूरी है, बच्चे से नज़दीकी – आपके पास होने का एहसास उसको बहुत आराम देगा। बच्चे को उठा ले, सहलाए, घुमाए और उसको चुप करवाए। इन सब में आप अपना आपा ना खोए।
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