
माँ के दूध या बोतल के दूध के कई महीनों के सेवन के बाद, अब आपका बच्चा नए खाद्य पदार्थ के सेवन के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन क्या आप बच्चे के आहार विविधीकरण के लिए तैयार हैं?
अगर बच्चे का आहार विविधीकरण थोड़ा-थोड़ा करें तो अच्छा होगा। कुछ बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए व्यंजन का प्रयोग धीरे धीरे और बच्चे की उम्र को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। जैसे जैसे आपके बच्चे का शरीर बढ़ता हैं, उसे ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करें और बच्चे के आहार में विविधता लाएं।
बच्चे का आहार विविधीकरण करना तब जरूरी होता है, जब माँ का दूध पर्याप्त पोषण नहीं दे सकता। आपको, माँ-बाप होने के नाते, बच्चे के आहार में अन्य व्यंजन (जैसे कि अनाज, फल, सब्जियां, मांस, आदि) धीरे धीरे लाना चाहिए। यह मौलिक कदम उठाने के लिए बच्चे के माँ-बाप को बच्चे का विकास और मुख्य आहार सिद्धांत, इन दोनों बातों के बारे में पता होना चाहिए।

बच्चे के आहार विविधीकरण की शुरुआत फल, सब्जियां और संभव हो सके तो शिशु अनाज से करें। आप गाजर, बिना त्वचा के शाकाहारी पदार्थ, और बीज से भी शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन टमाटर और मूली कम मात्रा मे दे क्योकि ये सब्जियां शिशु ज्यादा पचा नहीं सकते।
किसी भी प्रकार की जल्दबाजी ना करें और आपको कुछ पदार्थों की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए जैसे कि चीनी, शहद, चॉकलेट, जैम, और अन्य पदार्थ जिनमें हाई चर्बी होती हैं, और उनमें कोई पोषण मूल्य नहीं होता। अतिरिक्त चर्बी के लिए, हर एक व्यंजन पर एक चम्मच मक्खन या एक चम्मच जैतून/रेपसीड (श्वेत सरसों का तेल/कनोला का तेल) का तेल काफी है।
खाने के लिए बच्चे पर दबाव ना डालें। आपका बच्चा तब ही खायेगा, जब उसे भूख लगेगी। उस पर जोर जबरदस्ती करने से कोई फायदा नहीं होगा।

पीने के मामले में,जैसा कि मैंने पहले कहा था, चीनी का सेवन सीमित करें। किसी भी प्रकार के सोडा(यहां तक कि हल्का सोडा भी), सिरप, डिब्बा बंद फलों का रस बच्चे को ना पिलाएं, क्योंकि इनमे बहुत ज़्यादा केलोरी और मिठास होती है। ऐसे पेय बच्चों में मीठेपन का आकर्षण पैदा करते हैं, जो कि बच्चों के स्वास्थ लिए हानिकारक है।
अगर बच्चे को कोई फ़ूड एलेर्जी है, तो उस पर ध्यान दें। ख़ास करके जब आप का बच्चा इन एलर्जियों से पहले से ही पीड़ित हो तो, ज्यादा सावधान रहें। आहार विविधीकरण शुरू करने से पहले आपको इन बातों पर गंभीरता से विचार करना होगा।
अण्डों और मछली के सेवन के लिए बच्चे के एक वर्ष पुरे होने की प्रतीक्षा करें। कीवी और अजवाइन जैसे खाद्य पदार्थों जिनमें उच्च एलर्जिक क्षमता होती है, 1 वर्ष से पहले ना दें तो बेहतर होगा। 3 साल तक बच्चे को मूंगफली और नट्स जैसे उत्पाद ना दें।

बच्चे का आहार विविधीकरण शुरू करते वक्त, इन व्यंजनों के प्रति सजग रहें। यह उन व्यंजनों की सूची हैं, जो नवजात शिशुओं में कब्ज,एलर्जी, और डायरिया जैसे पाए जानेवाले बीमारियों का कारण बनते हैं।
- एलर्जिक फ़ूड– अंडे का सफ़ेद हिस्सा, गाय का दूध, मछली, स्ट्रॉबेरीज, तिलहन( मूंगफली, नट्स, बादाम, अखरोट,आदि)
- व्यंजन जो कब्ज का कारण बनते हैं– चावल, मांस, उबली हुए गाजर, और सेब
- व्यंजन जिनसे डायरिया होता है– नाशपाती, टमाटर, पालक, आलूबुखारा, और गाजर का रस
आपने अपने बच्चे का आहार विविधीकरण कैसे किया था? क्या आपको आहार विविधीकरण में कोई समस्या आयी थी? क्या आपके पास कोई बहुमूल्य जानकारी है, जो आप अन्य माताओं के साथ शेयर करना चाहती हो? कृपया निचे गए दिए कमेंट सेक्शन मे लिख कर हमें बताएँ।
सर्वोत्तम उपलब्ध भोजन विकल्प
हमने बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम उत्पादों को चुना है
Do you need more help?
क्या आपको और मदद चाहिए?
- Write a Comment
- Write a Review
- Ask a Question
Be kind to others. False language, promotions, personal attacks, and spam will be removed.Ask questions if any, by visiting Ask a Question section.
दूसरों के प्रति उदार रहें, अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें और किसी भी तरह का प्रचार ना करें।
यदि कोई प्रश्न हो तो, अपना प्रश्न पूछें सेक्शन पर जाएं।
सबसे पहले अपना अनुभव बाँटे।



